मूल्य
नैतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत सिद्धांत- जो हमारे जीवन को अर्थ देकर हमें निर्णय लेने में मदद करते हैं।
मूल्य शिक्षण
इन प्रश्नों को उत्तर देने के लिए मूल्य शिक्षण आवश्यक है ?
१. विश्व में शान्ति कैसे लाया जा सकता है ?
२. विश्व में भाईचारा कैसे लाया जा सकता है ?
३. विश्व में आपसी मैत्री कैसे लाया जा सकता है ?
४. विश्व में सामाजिक उत्तरदायित्वबोध कैसे लाया जा सकता है ?
५. विश्व में समस्याएं होने का मूल कारण क्या है ?
७. विश्व में ईमानदारी, दया, दान, सहिष्णुता, शिष्टाचार, सहानुभूति कैसे लाया जा सकता है
८. विश्व में सामजिक जारूकता कैसे लाया जा सकता है ?
९. विश्व में भाईचारा कैसे लाया जा सकता है ?
१०. विश्व में सामाजिक समरसता कैसे लाया जा सकता है ?
११.विश्व में राष्ट्रीय एकता,समानता, सामाजिक न्याय, और लोकतांत्रिक नागरिकता को बढ़ावा देने
१२.प्रत्येक मानवीय क्रिया व्यक्तिगत और सामाजिक मूल्यों का प्रतिबिंब है ,मानवीय क्रिया को बेहत्तर बनाने के लिए
मानविकता ( HUMANITY )
मानविकता मनुष्य के उन गुणों का सम्मिलित रूप है जो उसे संवेदनशील, समझदार, नैतिक और सह-अनुभूति रखने वाला बनाते हैं। यह वह क्षमता है जिसके कारण मनुष्य दूसरों की पीड़ा समझ सकता है, स्वयं को सुधार सकता है और समाज के प्रति अपने दायित्वों को पहचान सकता है|
मानविकता को मानवता का एक हिस्सा समझा जा सकता है।
मानवता एक व्यापक शब्द है, जिसमें पूरी मानव जाति से जुड़े नैतिक आदर्श और गुण आते हैं।जबकि मानविकता मनुष्य के व्यक्तिगत गुणों और व्यवहारों पर केंद्रित होती है।
यदि कोई व्यक्ति किसी घायल की मदद करता है, तो यह उसकी मानविकता का परिचय है।
जब समाज मिलकर मानव कल्याण के लिए काम करता है, तो यह मानवता का रूप है।
मानविकता में शामिल गुण
कबीरदास
जन्म: लगभग 1398 ईस्वी, वाराणसी (काशी) में।
नीरू और नीमा पिता और माता के रूप में जाना जाता है
रामानंद का शिष्य
जातिवाद, रूढ़िवाद और अंधविश्वास के विरोधी
भक्ति आंदोलन को और अधिक जन-जन तक पहुँचाया
देशाटन और साधुओंकी संगति से ज्ञानी बने
सामज सुधारक कवि
निर्गुण भक्तिधारा के कवि
ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि
बीजक (साखी,सबद,रमैनी) मुख्य रचना
धर्मदास ने बीजक का सम्पादन किया
सच्ची भक्ति, सामाजिक समानता, आत्मा की शुद्धि पर ज़ोर
भाषा- सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी
निराकार (बिना रूप या आकार के) ईश्वर की अवधारणा पर बल दिया
सामाजिक समरसता और समानता लाने का कोशिश
सूरदास
हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन कृष्ण भक्ति कवि
सगुण भक्ति शाखा के कवि
वात्सल्य और माधुर्य रस का अद्भुत संगम
सूरसागर’ ,‘सूरसारावली’,‘साहित्य-लहरी’ मुख्य रचनाएँ
व्रज भाषा में रचनाएँ
श्रीवल्लभाचार्य का शिष्य
पुष्टि मार्ग की अनुयायी
तुलसीदास
हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन कवि
राम भक्ति शाखा के प्रवर्तक
रामचरितमानस(अवधी में रचित रामायण का रूपांतरण) की रचयिता
कवितावली, विनय पत्रिका, दीपावली, हनुमान चालीसा आदि उनकी रचनाएँ
भाषा अवधी
भक्ति, नैतिकता, धर्म और मानव जीवन के आदर्श मूल्यों का चित्रण
बिहारी
बिहारी लाल चतुर्वेदी, जिन्हें आमतौर पर बिहारी के नाम से जाना जाता है
ब्रज भाषा में अपनी कविताएँ रची
बिहारी सतसई – 700 दोहों का संग्रह
प्रेम, श्रृंगार, और नीतिपरक भावनाओं का मिश्रण
रीतिकालीन कवि
रहीम
पूरा नाम: अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना
वो मुगल सम्राट अकबर के दरबारी कवि और सेनानी
भक्ति, नीतिवचन, और जीवन मूल्यों का संदेश
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