HIN4FV110(1) HINDI SAHITY MEIN MANIVKTA KA ALOK


मूल्य 

 नैतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत सिद्धांत- जो हमारे जीवन को अर्थ देकर  हमें निर्णय लेने में मदद करते हैं।

मूल्य शिक्षण 

इन प्रश्नों को उत्तर देने के लिए मूल्य शिक्षण आवश्यक है ?

१. विश्व में  शान्ति कैसे लाया  जा सकता है ?

२. विश्व में भाईचारा कैसे लाया जा सकता है ?

३. विश्व में आपसी मैत्री कैसे लाया जा सकता है ?

४. विश्व  में सामाजिक उत्तरदायित्वबोध कैसे लाया जा सकता है ? 

५. विश्व  में समस्याएं होने का मूल कारण क्या है ?

७. विश्व में ईमानदारी, दया, दान, सहिष्णुता, शिष्टाचार, सहानुभूति कैसे लाया जा सकता है 

८. विश्व में सामजिक जारूकता कैसे लाया जा सकता है ?

९. विश्व में भाईचारा कैसे लाया जा सकता है ?

१०. विश्व में सामाजिक समरसता कैसे लाया जा सकता है ?

११.विश्व में  राष्ट्रीय एकता,समानता, सामाजिक न्याय, और लोकतांत्रिक नागरिकता को बढ़ावा देने 
१२.प्रत्येक मानवीय क्रिया व्यक्तिगत और सामाजिक मूल्यों का प्रतिबिंब है ,मानवीय क्रिया को बेहत्तर बनाने के लिए 

मानविकता ( HUMANITY )
मानविकता मनुष्य के उन गुणों का सम्मिलित रूप है जो उसे संवेदनशील, समझदार, नैतिक और सह-अनुभूति रखने वाला बनाते हैं। यह वह क्षमता है जिसके कारण मनुष्य दूसरों की पीड़ा समझ सकता है, स्वयं को सुधार सकता है और समाज के प्रति अपने दायित्वों को पहचान सकता है|
मानविकता को मानवता का एक हिस्सा समझा जा सकता है।
मानवता एक व्यापक शब्द है, जिसमें पूरी मानव जाति से जुड़े नैतिक आदर्श और गुण आते हैं।जबकि मानविकता मनुष्य के व्यक्तिगत गुणों और व्यवहारों पर केंद्रित होती है।
यदि कोई व्यक्ति किसी घायल की मदद करता है, तो यह उसकी मानविकता का परिचय है।
जब समाज मिलकर मानव कल्याण के लिए काम करता है, तो यह मानवता का रूप है।
  

मानविकता में शामिल गुण

  • करुणा (दूसरों के दुख को महसूस करना)

  • सहानुभूति (अनुभव को समझना)

  • नैतिकता (सही–गलत का बोध)

  • समझदारी और विवेक

  • सद्भावना और सहयोग

  • सम्मान और विनम्रता

कबीरदास 

जन्म: लगभग 1398 ईस्वी, वाराणसी (काशी) में।
नीरू और नीमा पिता और माता के रूप में जाना जाता है 
रामानंद का शिष्य 
जातिवाद, रूढ़िवाद और अंधविश्वास के विरोधी
भक्ति आंदोलन को और अधिक जन-जन तक पहुँचाया 
देशाटन और साधुओंकी संगति से ज्ञानी बने 
सामज सुधारक कवि 
निर्गुण भक्तिधारा के कवि 
ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि 
बीजक (साखी,सबद,रमैनी) मुख्य रचना 
धर्मदास ने  बीजक का सम्पादन किया 
सच्ची भक्ति, सामाजिक समानता, आत्मा की शुद्धि पर ज़ोर 
भाषा- सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी 
👉 निराकार (बिना रूप या आकार के) ईश्वर की अवधारणा पर बल दिया
👉 सामाजिक समरसता और समानता लाने का कोशिश 
👉 दुःख में सब ईश्वर का स्मरण करता है ,सुख  में नहीं | अगर हम सुख में सभी सरन करेंगे तो दुःख होगा ही नहीं 
👉 कटु वचन शान्ति का भंग करते है ,सज्जन का वचन जल के समान होता है 
सूरदास 

हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन कृष्ण भक्ति कवि 
सगुण भक्ति शाखा के कवि 
वात्सल्य और माधुर्य रस का अद्भुत संगम
सूरसागर’ ,‘सूरसारावली’,‘साहित्य-लहरी’ मुख्य रचनाएँ 
व्रज भाषा में रचनाएँ 
श्रीवल्लभाचार्य का शिष्य 
पुष्टि मार्ग की अनुयायी 

👉 कन्हाई  यशोदा को मैया ,नंद को बाबा  और हलधर को  भैया बुलाने की ख़ुशी 

तुलसीदास 
हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन कवि 
राम भक्ति शाखा के प्रवर्तक 
रामचरितमानस(अवधी में रचित रामायण का रूपांतरण) की रचयिता
कवितावली, विनय पत्रिका, दीपावली, हनुमान चालीसा आदि उनकी रचनाएँ 
भाषा अवधी
भक्ति, नैतिकता, धर्म और मानव जीवन के आदर्श मूल्यों का चित्रण
👉 तुलसीदास की एकनिष्ठ राम भक्ति का परिचय 
👉 सज्जन और पेड़ सब कुछ दूसरों के लिए करते है 

रहीम 
पूरा नाम: अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना
वो मुगल सम्राट अकबर के दरबारी कवि और सेनानी 
भक्ति, नीतिवचन, और जीवन मूल्यों का संदेश
👉 पानी के बिना सब सून 
👉 पानी (मर्यादा,शील ,लज्जा) खो जाने पर मनुष्य का जीवन अर्थ हीन  हो जाता है 
👉 मन की व्यथा सबसे कहते रहने से कोई फायदा नहीं 
वृंद 
नीति साहित्य के कवि 
असली नाम वृन्दावनदास 
वृन्द सतसई मुख्य रचना 
👉 जिनमें देने के मन नहीं हिअ,वहाँ जाना नहीं चाहिए ,पियास होने पर बिना पानीवाले सरोवर के पास जाने से क्या फायदा 
👉 झगड़ा या क्रोध मीठी वचनों से शान्त कर सकते है,उबलनेवाले दूध को शांत करने ठंडा पानी मिलाता है 

उपहार -नीरज कुमार मिश्रा 

छोटी कहानी 
👉 आनी और तेजस मुख्य पात्र 
👉 भूमंडलीकरण के कारण आये परिवर्तन 
👉 पर्यावरण बचाने की सलाह 
👉 खाद्य पदार्थ चुनने में सतर्क होने की आवश्यकता 
👉 बच्चों को विषय बता देने की तरीके 
👉 विज्ञान का गुण  और दोष 
👉 संतुलित भोजन की आवशयकता 

अरविन्द गौड़ -कूड़ा कचरा (नुक्क्ड़ नाटक )
अभिनेता प्रशिक्षक एवं रंगकर्मी 
अस्मिता थियेटर ग्रुप के मुख्य प्रवर्त्तक 
👉 समाज में सफाई और कचरा प्रबंधन की समस्याओं पर प्रकाश डालना 
👉 कूड़ा कचरा फेंकने से होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरणीय उथल पुथल 
👉 आम नागरिक, सफाई कर्मचारी, बच्चे, और स्थानीय प्रशासन आदि मुख्य पात्र 
👉 गाँव एवं शहर की गलियों में कचरा इकट्ठा होने की समस्या
हरिवंशराय बच्चन -आज मुझसे दूर दुनिया 
'तेरा हार' पहला कविता संग्रह 
साहित्य यात्रा की शुरुआत 'मधशाला'से 
👉 अपने आत्मिक अनुभव और मानसिक उदासी को व्यक्त कर रहे हैं।
👉 अकेलापन और समाज से अलगाव
👉 जीवन के अस्तित्व और समाज के साथ अपने संबंध पर सवाल उठाता है 
यह पृथ्वी रहेगी - केदारनाथ सिंह 
तीसरा सप्तक के कवि 
भारत सरकार ज्ञानपीठ सपुरस्कार से सम्मानित किया है 
'साखी' पत्रिका का सम्पादन 
👉 कवि बताते हैं कि चाहे मानव जाएँ, पृथ्वी अपने अस्तित्व में बनी रहेगी।
नरेश सक्सेना -मछलियाँ 
सातवें दशक के कवि
👉 मछलीघर की पानी गंदा होने से मछलियां  मर जाना 
👉 राखी मछली बनाने की प्रार्थना करती है 
👉 कवि मछली -लिख देता है तो राखी बताती है उसके पहले साफ़ पानी भी लिखिए 
👉 पर्यावरण पर हो रहे प्रदूषण पर विचार 
👉 पर्यायवरण संरक्षण की आवश्यकता 
अनामिका -वृद्धाएँ धरती का नमक है 
आधुनिक हिंदी कवयित्री और लेखिका
👉 वृद्ध महिलाओं के जीवन और योगदान
👉 अनुभव, ज्ञान और धैर्य का स्रोत वृद्धाएँ 
👉 नैतिक और सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत बनाने की कड़ी 
👉 वृद्धाओं के सम्मान और उनके महत्व पर विचार 
                      पार्वती तिर्की -नकदौना चिड़िया 
👉 प्रकृति और मानव का रिश्ता 
👉 जनजातीय संस्कृति का चित्रण 
👉 जनजातीय लोगों के जीवन का चित्रण 
👉 प्रकृति के साथ जीने से प्रकृति की आवाज़ सुनंने की क्षमता 
👉 नमक  स्वाद और संतुलन लाता है, उसी प्रकार वृद्धाएँ समाज और परिवार को संतुलित रखती हैं
हमको मन की शक्ति देना -गुलज़ार 
पूरा नाम: गुलज़ार साहब (राजेंद्र सिंह गुलज़ार)
कवि, गीतकार, लेखक और फ़िल्म निर्देशक
👉 आत्मिक शक्ति, धैर्य और आत्म-नियंत्रण पर विचार 
👉 मन को स्थिर और शक्तिशाली बनाने की प्रार्थना 
👉 विचारों पर नियंत्रण करने की प्रार्थना 
👉 दूसरों पर जीत हासिल करने के पहले अपने आप पर जीत हासिल करना है 

                      ओमप्रकाश वाल्मीकि -पच्चीस चौका डेढ़ सौ 
हिंदी के प्रमुख दलित साहित्यकार
कवि, कहानीकार और सामाजिक चिंतक
आत्मकथा जूठन 
“पच्चीस चौका डेढ़ सौ”, “सलाम” आदि मुख्य रचनाएँ 
👉भारतीय समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव का चित्रण 
👉भारतीय समाज में व्याप्त शोशान का चित्रण 
👉अशिक्षा और सामाजिक दबाव और दलित समाज 
👉शिक्षा की कमी 
👉गाँवों का आर्थिक असुरक्षा 
👉सामाजिक असमानता 
👉नौकरी के क्षेत्र और नौकर का जीवन 
👉25 × 4 = 150 बताकर दलित परिवार से अधिक पैसे वसूलता है।
👉समाज की सच्चाई का चित्रण 




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