HIN3 FM
107(2)
MDC3
KERAL KA
SANSKRITHIK
SAUNDARYA
(The Cultural
Aesthetics of Kerala)
केरल का इतिहास
पुराना केरल -त्रावणकोर ,कोच्चिं और मलबार रियासतों में बाँटा था
केरल राज्य का जन्म १ नवंबर १९५६०को
भारत सरकार का राज्य पुनर्गठन अधिनियम १९५६ के आधार पर केरल राज्य का गठन
विस्तृत जानकारी केलिए देखें ---- राज्य पुनर्गठन अधिनियम
केरल की भौगोलिक विशेषतायें
केरल राज्य पश्चिमी तट पर स्थित है
पूर्व में पश्चिमी घाट एवं पश्चिम में अरब सागर है।
केरल राज्य मुख्य भौगोलिक क्षेत्रों में बँटा है: पहाड़ी इलाका , मध्यभूमि (मैदान) और निम्नभूमि (तटवर्ती क्षेत्र)।
बैकवाटर या कायल
यह एक नदी का हिस्सा होता है जहां पानी की बहाव धीमी होती है
बांध, पुल, या समुद्री ज्वार जैसे अवरोध के कारण पानी के पीछे धकेलने से बैकवाटर बनता है।
आलप्पुषा , 'पूर्व का वेनिस' कहा जाता है
केरल के प्रमुख कायल -वेम्बनाड कायल , अष्टमुडी कायल और कव्वायी कायल
केरल में आये यूरोपीय
पुर्तगाली (वास्को दी गामा -कोप्पाड १४९८ )
डच (कोच्चि)
अँगरेज़
फ्रांसीसी (माहि)
कोच्चि रियासत की कहानी
सामूतिरि राज वंश
संगम युग
संगम’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है — ‘संगम’ या ‘मिलन’
तमिल साहित्य, संस्कृति और राजनीतिक संस्थाओं की प्रगति का युग
संगम युग के दौरान, तीन राजवंशों का शासन था: चेर, चोल और पांड्य।
अमायचर, अन्थनार,सेनापति, दूत , और जासूस (ओरर) शासन के लिए मदद देते थे
संगम साहित्य में एत्तुत्तोगई, पट्टुप्पट्टु, पथिनेंकिलकनक्कु, दो महाकाव्य सिलप्पादिकारम और मणिमेकलई,तोलकाप्पियम विख्यात है
संगम युग की महत्त्वपूर्ण विशेषता इसका आंतरिक और बाहरी व्यापार था
Chera dyansty
चेर राजवंश
चेर राज वंश
चेरों ने आधुनिक राज्य केरल के मध्य और उत्तरी हिस्सों तथा तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र को नियंत्रित किया।
चेर राज वंश विकेन्द्रीकृत प्रशासन करते थे
चेर साम्राज्य की राजधानी वंजी थी
चेर साम्राज्य के मुज़िरिस उस ज़माने के महत्वपूर्ण बंदरगाह थे,
रोमन राज्यों के साथ व्यापार संबंध
चेर राजाओं को "केरलपुत्र" (केरल के पुत्र) के रूप में भी जाना जाता था
नेदुंजरल अदन,सेंगुट्टुवन आदि प्रमुख राजा
चेरों के बारे में जानकरी संगम साहित्य के ग्रंथों से मिलता है
चेर राज वंश के समय के प्रमुख साहित्यकार एवं रचना
इलांगो अदिगल – “सिलप्पदिकारम” ।
सीतानार – “मणिमेखलै”
तिरुवल्लुवर – “तिरुक्कुरल”
कुलशेखर अलवर – वैष्णव भक्ति संत
कुलशेखर राज वंश
कुलशेखर राजवंश का स्थापक कुलशेखर वर्मन
उनेक शासन काल केरल के इतिहास में वाणिज्य, विज्ञान, कला और साहित्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण
कुलशेखर वर्मन,राजशिक्षा वर्मन आदि प्रमुख राजा
राजधानी महोदयपुरम
Ancient South Indian Kingdoms
केरल की जन जातियाँ
केरल पुनर्जागरण काल और प्रमुख व्यक्तित्व
पुनर्जागरण
"पुनर्जागरण" का अर्थ है -नया जन्म
14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच यूरोप में शुरू हुई
कला, विज्ञान, साहित्य और मानवता के क्षेत्र में नए विचारों और खोजों का उदय
भारत में भी इसका आसर आया
मानवतावाद,धर्मनिरपेक्षता,वैज्ञानिक नवाचार,विचारों का प्रसार आदि इस की विशेषताएं है
विदेशी प्रभुत्व के विरुद्ध आंदोलन को जन्म दिया
केरल पुनर्जागरण का परिचय
19वीं और 20वीं शताब्दी में केरल में हुए सामाजिक-धार्मिक और राजनीतिक सुधारों का एक महत्वपूर्ण आंदोलन
पारंपरिक जाति व्यवस्था, सामाजिक असमानता और अंधविश्वास को चुनौती
शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढाँचे, सामाजिक समानता और आर्थिक विकास के लिए सहायक रहा
केरल राज्य के महान संत एवं समाजसुधारक
केरल राज्य के महान संत एवं समाजसुधारक
सामजिक क्रान्ति के अग्रदूत
नारायण गुरु का जन्म 22 अगस्त 1856 में हुआ
शंकराचार्य के समान अद्वैतवाद के प्रवर्तक
श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP) की स्थापना
1888 में, अरुविप्पुरम में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर का निर्माण
1904 में शिवगिरी मठ की स्थापना
1914 में उन्होंने अलुवा में अद्वैत आश्रम की स्थापना
20 सितम्बर 1928 को निधन
दुनिया को दिए महा मंत्र - " एक जाती ,एक धर्म और एक ईश्वर मानव का"
रचनाएँ -आत्मोपदेशशतकं,दैवदशकं,दर्शनमाल,अद्वैतदीपिक आदि
💻 श्री नारायण गुरु
श्री नारायण गुरु
📺Malayalam Full Movie - Sree Narayana Guru
अय्यनकाली
अय्यनकाली -(1863 - 1941) सामाजिक समानता, शिक्षा, और दलित अधिकारों के प्रति समर्पित समाज सुधारक
अय्यन और माला के पुत्र
दलित लोगों को रास्ता का इस्तमाल करने का आंदोलन
दलित लोगों को शिक्षा मिलने का आंदोलन
केरल की पहली श्रमिक हड़ताल का नायक
1904 में वेंगनूर में दलितों के लिए केरल का पहला स्कूल खोला
1907 में अय्यनकली के नेतृत्व में साधु जन परिपालन संगम की स्थापना
1924 वैकम सत्याग्रह , 1931 में हुए गुरूवयूर सत्याग्रह में भागीदारी
अय्यनकाली परिचय 1
अय्यनकाली परिचय 2
अय्यनकाली -भाषण
दाक्षायणी वेलयुधन
जन्म 15 1945 में
कोचीन विधान परिषद के लिए चुने गए।
1946 में संविधान सभा के लिए चुनी गई दलित जाति की पहली और एकमात्र महिला।
अस्पृश्यता और आरक्षण के खिलाफ आवाज़ उठायी
अनुसूचित जाति की पहली महिला ग्रेजुएट
मद्रास निर्वाचन क्षेत्र से संसद के सदस्य
संविधान की केंद्रीकरण प्रवृत्ति की आलोचना : विकेन्द्रीकरण पर बल
संसद के प्रधम दलित दम्पति
महिला जागृति परिषद(1977) की स्थापना जुलाई 1912 को मुलावुकाड में
दलित चेतना और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक
केरल सरकार द्वारा 2019 में स्थापित दाक्षायणी वेलायुधन पुरस्कार
दाक्षायणी वेलायुधन के बारे में और पढ़ें
दाक्षायणी वेलयुधन परिचय
Women in Constituent Assembly | Episode 1: Dakshayani Velayudhan
पंडित करुप्पन
पंडित करुप्पन परिचयपंडित करुप्पन परिचय
एक कवि, नाटककार और समाज सुधारक
केरल का " लिंकन "
पंडित करुप्पन का मूल नाम - शंकरन
गुरु -वेलु वैद्य
14 फरवरी 1913 को कायल सम्मेलन का आयोजन
1925 में कोचीन विधान सभा का सदस्य
जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता पर सवाल उठाने वाली रचना - जातिकुम्मी
अरय समाज,कल्याणदायिनी सभा, प्रबोध चंद्रोदय सभा आदि की स्थापना
पंडित करुप्पन को कवितिलक, साहित्य निपुण की उपाधि कोचीन के महाराजा ने दी |
पंडित करुप्पन को विदवान की उपाधि केरल वर्मा वलियाकोई तंपुरान ने दी |
केरल की मसला विरासत
केरल "मसालों की भूमि" जाना जाता है
काली मिर्च, इलायची, दालचीनी, लौंग जैसे मसालों का उत्पादन और व्यापार
पुराने ज़माने से ही मुज़िरिस जैसे प्राचीन बंदरगाहों ने वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
काली मिर्च- मसलों का राजा
काली मिर्च का बड़ा उत्पादक राज्य
इलायची -मसलों की रानी
अदरक , जायफल, हल्दी आदि केलिए भी केरल विख्यात
भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान की स्थापना 1995 में
केरल राज्य पर अरब प्रभाव
व्यापार, संस्कृति और भाषा के क्षेत्र में प्रभाव
मप्पिला संगीत अरबी धुनों और लय से प्रभावित है
केरल के मुसलमानों पर अरबों का कितना असर
केरल पर चीनी प्रभाव
प्राचीन और मध्यकालीन युग में व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के रूप में
चीन और केरल का व्यापार संबंध
चीन वला,चीन चटटी ,चीन भरनी आदि प्रभाव का उदाहरण है
पुर्तगाली प्रभाव
मलयालम भाषा में पुर्तगाली भाषा से 300 से अधिक शब्द हैं
वास्तुकला पर प्रभाव
प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत ने केरल में शिक्षा को बढ़ावा दिया
खाद्य वस्तुओं का आगमन
केरल पर डच प्रभाव
वास्तुकला, व्यापारिक नियंत्रण और सैन्य रणनीति में प्रभाव
डच वनस्पतिशास्त्रियों द्वारा संकलित होरतूस इंडिकस मालाबारिकस ने केरल के पौधों के औषधीय गुणों का दस्तावेजीकरण किया
केरल के परम्परिक वाद्य यंत्र
चेंडा केरल का एक पारंपरिक ताल वाद्य यंत्र है
कटहल के पेड़ की लकड़ी ,चर्मपत्र और चमड़े से निर्मित
कथकली ,कुटियाट्टम,थेय्यम, कन्यार्काली और मंदिर जुलूस में इस्तमाल किया जाता है
चेंडा वादन सुनते वक्त श्रोता सहज रूप से हाथों के हावभाव और लयबद्ध गति के साथ प्रतिक्रिया
प्राचीन काल में महत्वपूर्ण सूचनाएँ देने के लिए उपयोग करता था
तुड़ी
तुड़ी छोटा घंटाकार वाद्य यंत्र
आदिवासी समूह इस्तमाल करता है
आम के पेड़ और चमड़े से बनया जाता है
केरल की वास्तु कला
सौंदर्य, कार्यक्षमता और पर्यावरण का मिश्रण
प्रमुख विशेषताएँ
जलवायु पर आधारित डिज़ाइन
लकड़ी का प्रयोग
नालुकेट्टु शैली
ढलान वाली छत
मंदिर वास्तु कला
हिंदू, बौद्ध ,द्रविड़ वास्तुकला का मिश्रण
स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों की सहायता से बनाया गया
जलवायु और सामाजिक-आर्थिक संबंधों को प्रधानता
केरल के मंदिर पूरी तरह से एक विशाल दीवार से घिरे होते हैं
मंदिर के भाग
👉श्री-कोविल
👉नमस्कार मंडपम
👉नालम्बलम
👉बलिथारा
👉चुट्टम्बलम
👉अंबाला-कुलम
👉थेवरपुरा
👉कुत्तमबलम
नालुकेट्टू के मुख्य अंग
पडिप्पुरा
पूमुघम
चुट्टुवरांदा
चारुपदी
अम्बालकुलम
नटुमुटटम
पूजा कक्ष
केरल की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ
केरल कलामंडलम
Kerala Kalamandalam - Sculpting a Legacy
केरला कलामंडलम त्रिशूर जिले के चेरुथुरुथी में है
वल्लथोल नारायण मेनन और मणक्कुलम मुकुंद राजा ने वर्ष 1930 में की थी
केरल राज्य का मानद विश्वविद्यालय
कूत्तम्बलम
केरल के शास्त्रीय नृत्य
कथकली
केरल का पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य-नाटक
नृत्य, संगीत, अभिनय और वेशभूषा का एक अनूठा संयोजन
चंडा,मद्दलम,और चेंगिला का प्रयोग
कूड़ियाटटम
कुटियाट्टम, संस्कृत भारत की सबसे पुरानी जीवित नाट्य परंपराओं में से एक है
केरल का एक रंग मंच प्रदर्शन
कूड़ियाटटम में 'आंगिक', 'वाचिक', 'सात्विक' और 'आहार्य'- ये चारों रीतियाँ जुड़ी हैं।
UNESCO -Intangible Cultural Heritage सूची में शामिल
केरल का एक शास्त्रीय नृत्य
भगवान विष्णु के मोहिनी रूप पर आधारित कला रूप
लास्य शैली पर आधारित नृत्य
चाक्यारकूथु
केरल का पारम्परिक नृत्य रूप
प्रदर्शन कला
कुटियाट्टम की एक उप-शैली
प्रमुख मंदिर कला
मिषाव मुख्य वाद्य
नंगियार कूत्तु
कूत्तु के महिला संस्करण
केरल का पारम्परिक नृत्य रूप
प्रदर्शन कला
प्रमुख मंदिर कला
औरते भाग लेती है
संस्कृत रंमिषाव मुख्य वाद्य ग मंच से आया हुआ कला रूप
मिषाव मुख्य वाद्य
तेय्यम
"थेय्यम" शब्द "दैवम्" (देवता) से निकला है, जिसका अर्थ "भगवान"
कन्नूर, कासरगोड और वायनाड में प्रचलित
धार्मिक लोक नृत्य
Theyyam
केरल संगीत नाटक अकादमी
त्रिशूर में स्थित एक स्वायत्त संगठन
१९५८ में स्थापित संस्था
पारम्परिक कला रूपों को समर्थन देना मुख्य उदेश्य
कलाओं का प्रचार
पुरस्कार
कार्यशालाओं का आयोजन
केरल संगीत नाटक अकादमी
भित्ति चित्र -
भित्तिचित्र कला (Mural) सबसे पुरानी चित्रकला
तिरुवंचिकुलम के भित्ति चित्र
वैकोम मंदिर , त्रिप्रांगोडे, गुरुवायूर , कुमारनल्लूर , अयमानम , वडक्कुनाथन मंदिर, कन्नूर में थोडीक्कलम मंदिर , श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर
राजा रवि वर्मा -आधुनिक भारत के अग्रणी चित्रकार
केरल सरकार राजा रवि वर्मा पुरस्कारम नामक एक पुरस्कार हर साल कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्टता दिखाने वाले लोगों को देते है
ओणम
ओणम केरल का एक प्रमुख त्योहार
ओणम का उत्सव चिंगममास में भगवान वामन की जयन्ती और राजा बलि के स्वागत में आयोजित किया जाता
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस
केरल के अलाप्पुझा के पुन्नमडाकायल् में आयोजित होने वाली नौका दौड़ है
भारत के पहले प्रधानमंत्री, जवाहरलाल नेहरू के नाम पर ट्रॉफी दिया जाता है
त्रिशूर पूरम
वटक्कुंनाथन मंदिर के तेक्किन काडु मैदान में होनेवाले वार्षिक मंदिर उत्सव
"सभी पूरमों की जननी" माना जाता है
कोच्ची के महाराजा शक्तन तंपुरान द्वारा आरंभ किया गया था
पारामेक्कावु, तिरुवम्बाडि, कणिमंगलम, कारामुक्कु, लालूर, चुरक्काट्टुकरा, पनामुक्कुंपिल्ली, अय्यन्तोल, चेम्बूक्कावु, नैतलक्कावु मंदिर इसमें बहग लेते है
चेण्डा, कुरुमकुषल,मद्दलम कोम्बु और इलत्तालम के २५० से ज़्यादा कलाकार 'इलनजीतरा मैं में भाग लेते है
भव्य आतिशबाजी
तेज गति से लयबद्ध तरीके से रंग-बिरंगी चमकीली छतरियों के हस्तांतरण वाला कुडमाट्टम
मट्टनचेरी
एर्नाकुलम जिला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगह
डच नोग इधर आये थे
मट्टान्चेरी महल, जिसे डच पैलेस भी कहा जाता है, केरल शैली के वास्तु का सुंदर नमूना
भित्तिचित्रों के सुंदर संकलन इस महल में है
व्यंजनॉ के व्यापार का केंद्र
1904 में बनाया गया जैन मंदिर वहाँ है
भारत का सबसे पुरानासिनेगॉग -परदेसी सिनगॉग यहाँ है
यह यहूदी आराधनालय 1568 में बनाया गया था
हाथ से पेंट की गई चीनी मिट्टी की टाइलें इसकी विशेषता है
मट्टनचेरी छोटा भारत का नमूना है
केरला का सिनेमा
1907 में त्रिशूर में पहले सिनेमा हॉल के खुलने से शुरू हुयी यात्रा
1928 में जे.सी. डैनियल की मूक फिल्म 'विगत कुमारन'
1938 में, 'बालन' पहली बोलती फिल्म
1948 में 'उदया स्टूडियो' की स्थापना
मलयालम सिनेमा ने हमेशा प्रासंगिक सामाजिक मुद्दों को विषय बनाया
मलयालम सिनेमा की पहली रंगीन फिल्म कंडम बच्चा कोट (1961)
रामू करियात द्वारा निर्देशित थकाझी शिवशंकर पिल्लई के उपन्यास पर आधारित "चेम्मीन" (1965)
मलयालम के फिल्म निदेशक जै.सी डेनियल.एम्.टी वासुदेवन नायर,रामु कारियात ,ब्लेसी,पद्मराजन आदि
ओरु वटक्कन वीरगाथा
1989 में रिलीज़ हुई, "ओरु वडक्कन वीरगाथा"
वटक्कन पाटु का एक हिस्सा
योद्धा चन्तु और आरोमॉल चकवार की गाथा
चन्तु (मम्मूट्टि),आरोमाल चकवार (सुरेश गोपी ),उन्नीयार्चा (माधवी )
इसका निर्माण पीवी गंगाधरन
पटकथा -एम्.टी वासुदेवन नायर
वटक्कन पात और कलरिपयट्ट का चित्रण
दुनिया की पुरानी युद्ध कला
केरला का मार्शियल आर्ट
कलरीपयट्टु दो शैली -वडक्कन या उत्तरी शैली ,थेक्केन या दक्षिणी शैली
कलारीपयट्टू के विभिन्न चरण
मेयतारी : शरीर नियंत्रण व्यायाम
कोलथारी : लकड़ी के हथियारों का अभ्यास
अंकथारी : धातु के हथियारों का अभ्यास
वेरुमकई : नंगे हाथ से लड़ने की तकनीक
वटक्कन पाट्टुकल
उत्तर केरला में प्रचलित लोक गीत
स्थानीय वीरों के वीरता काकेरल साक्षरता
केरल की साक्षरता
केरल की साक्षरता दर देश में सबसे अधिक
केरल राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण १९९८ में स्थापित
"सभी के लिए शिक्षा और हमेशा के लिए शिक्षा" नारा
मुख्यालय तिरुवनंतपुरम
१९९१ में यूनेस्को पूर्ण साक्षर राज्य की हैसियत दी
भारत का ‘पहला’ डिजिटल साक्षर राज्य
साक्षरता कार्यक्रम 'चांगथी'
अक्षरा लक्षम
समकक्ष कार्यक्रम वर्णन
केरल शास्त्र साहित्य परिषद
१९६२ में स्थापित संस्था
एक जन विज्ञान आंदोलन
विज्ञान का प्रचार-प्रसार
"सामाजिक क्रांति के लिए विज्ञान" आदर्श वाक्य
परिषद द्वारा प्रकाशित विज्ञान पत्रिका-शास्त्र केरलम ,शास्त्र गति,यूरेका
शिक्षक प्रशिक्षण
विज्ञानं मेला
पर्यावरण संरक्षण
अनुसंधान
अंतरिक्ष तक पहुंच बनाने के लिए प्रमोचक रॉकेट वाहनों व तत्संबंधित प्रौद्योगिकियों का अभिकल्प्न व विकास
भू-पर्यवेक्षण, संचार, दिशानिर्देशन, मौसमविज्ञान तथा अंतरिक्षविज्ञान के लिए उपग्रहों व तत्संबंधित प्रौद्योगिकियों का अभिकल्पं व विकास
दूरसंचार, टेलिविज़न प्रसारण तथा विकास संबंधित अनुपयोगों के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इन्सैट) कार्यक्रम
उपग्रह अधारित चित्रों द्वारा प्राकृतिक संसाधानों के प्रबंधन तथा पर्यावरण के माँनिटरन के वास्ते भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस) कार्यक्रम
सामाजिक विकास तथा आपदा प्रबंधन में सहायता के लिए अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोग
वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में महत्वउपूर्ण भूमिका के लिए निजी कंपनियों को संवर्धित एवं प्राधिकृत करना
वी. एस. एस.सी
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम,
प्रमोचन रॉकेट प्रौद्योगिकी के डिजाइन और विकास के लिए जिम्मेदार इसरो का प्रमुख केंद्र
केरल के पर्यावरण संघर्ष
👉साइलेंट वाली आंदोलन
1973 में साइलेंट वैली को जलविद्युत परियोजना से बचाने के लिए शुरू पर्यावरण आंदोलन
नेतृत्व केरल शास्त्र साहित्य परिषद
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने परियोजना को रद्द करने का आदेश दिया
१९८४ राष्ट्रीय उद्यान बनाया
👉प्लाचीमाडा आंदोलन
केरल के प्लाचीमाडा गाँव में कोका-कोला के कारखाने के खिलाफ एक जन विरोध
नेतृत्य मइलम्मा ने दी
कोकाकोला के खिलाफ आंदोलन
केरल का खेल इतिहास
तलपंत कली
ओणम के अवसर पर बच्चों और बड़ों द्वारा खेला जाता है
ओणपन्तु नाम से भी जाना जाता है
खिलाड़ियों को दो टीमों में बांटा गया है
एक टीम को गेंद फेंकना है जबकि दूसरा गार्ड खड़ा होना है
पि.टी.उषा
"भारतीय ट्रैक एंड फील्ड की राणी
पय्य्योली एक्सप्रेस
1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में \(400\) मीटर बाधा दौड़ में वह पदक से मात्र \(1/100\)सेकंड से चूक गईं।
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष
राज्यसभा की सदस्य
आई. एम् विजयन
पूरा नाम इनिवलाप्पिल मणि विजयन
केरल का विख्यात फ़ुटबाल खिलाडी
केरला का पहला अर्जुन पुरस्कार विजेता
अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे तेज गोल करने का रिकॉर्ड
केरल के विश्व विद्यालय
केरल के विश्व विद्यालय -अतिरिक्त जानकारी
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
केरल विश्वविद्यालय
महात्मा गांधी विश्वविद्यालय
कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
कालीकट विश्वविद्यालय
कन्नूर विश्वविद्यालय
तुंचत् एझुथाचन मलयालम विश्वविद्यालय
राष्ट्रीय उन्नत विधि अध्ययन विश्वविद्यालय
श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय
भारतीय अंतरीक्ष विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी संस्थान
केरल एग्रीकल्चरल विश्व विद्यालय
श्री नारायण गुरु मुक्त विश्व विद्यालय
केरल डिजिटल विश्व विद्यालय
केरल कलामंडलम
चिन्मय विश्व विद्यापीठ
अमृता विश्व विद्या पीठ
छात्र वृत्ती
केरल मोडल की विशेषताएं
केरल मॉडल , केरल द्वारा मानव विकास को आगे बढ़ाने के लिए अपनाई गई प्रथाओं को संदर्भित करता है।
१.शिक्षा पर ज़ोर ,उच्च साक्षरता दर
२. बेहतरीन संगठित सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा
३.भूमि सुधर
४. कम शिशु मृत्य दर
५. कम जन्म दर
६. मानव विकास पर ध्यान
७. पंचायती राज का सही पालन
८. महिला सशक्तीकरण
९. उच्च जीवन प्रत्याशा
१० जातिगत व लैंगिक असमानता कम
११. व्यापक कल्याणकारी योजना
१२.सामजी और आर्थिक परिवर्तन
१३ सामजिक उदारीकरण
१४.कृषि क्षेत्र में आधुनिक विधाओं का प्रयोग
१५. वायु,जल,जीव जंतु ,वनस्पति जैसे प्राकृतिक संसाधनों का सुधार
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